पश्चिम बंगाल की सियासत में आज से बड़ा उबाल आने वाला है। तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर आज से मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू करने वाले हैं। आज पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ मस्जिद की नींव रखी जाएगी। नींव रखने से पहले सैकड़ों काजी कुरान का पाठ करेंगे। इसके बाद दोपहर साढ़े 12 बजे से निर्माण का काम शुरू होगा।
हुमायूं कबीर का दावा है कि 2 साल अंदर मस्जिद के निर्माण का काम पूरा हो जाएगा। आज नींव डालने के मौके पर 2 लाख लोगों के आने का दावा किया जा रहा है। जमीन की खुदाई चल रही है। मशीनें और मजदूर काम पर लग चुके हैं। ईंटो का अंबार लगा हुआ है। आज मस्जिद की नींव रखे जाने के मौके पर बड़े जलसे की तैयारी है।
जन उन्नयन पार्टी के चीफ हुमायूं कबीर ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मैं ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करता हूं। आज इतने सारे लोग मेरे साथ खड़े हैं, मैं उन सभी का भी शुक्रिया अदा करता हूं। दूसरों को मेरा विरोध करने दो। अगले दो सालों में, मुझे उम्मीद है कि बाबरी मस्जिद का ढांचा पूरा हो जाएगा। मंदिर बनाना ठीक है, लेकिन अगर कोई मुसलमान मस्जिद बनाना चाहता है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं। हम उन्हें सत्ता से बाहर कर देंगे।"
इससे पहले 6 दिसंबर को निलंबित विधायक ने फीता काटकर औपचारिक उदघाटन किया था। हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा के जिस प्लॉट पर बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी, वहां भीड़ उमड़ी थी। नमाज के बाद लोगों के लिए बाकायदा दावत का इंतजाम किया गया था। हजारों लोग प्रस्तावित साइट पर नमाज के लिए पहुंचे थे।
हुमायूं कबीर की ये मुहिम पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में तूफान पैदा कर रही थी। अब देश के दूसरे हिस्सों में बाबरी के नाम पर मस्जिद का विरोध होने लगा है। यूपी के सीएम ने साफ साफ कह दिया है कि बाबरी के नाम पर मस्जिद का सपना कयामत तक पूरा नहीं होगा।
मुर्शिदाबाद में बन रही बाबरी मस्जिद का जगह जगह विरोध शुरू हो गया है। दिल्ली में जंतर मंतर पर बाबरी के नाम पर मस्जिद का विरोध किया गया। यूपी में विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कार्यकर्ता अपना काफिला लेकर मुर्शिदाबाद निकल पड़े। हाथ में फावड़ा कुदाल लेकर यूपी के अलग-अलग जिलों से निकल रहे थे लेकिन लखनऊ पुलिस ने जाने से रोक दिया है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के लोगों ने कहा कि उन्हें मस्जिद बनाने पर ऐतराज नहीं है लेकिन बाबर के नाम पर मस्जिद बने, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मुद्दा पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का बड़ा कारण बन रहा है। हुमायूं कबीर इसे मुसलमानों की गरिमा और भावनाओं से जोड़ रहे हैं जबकि हिंदू संगठन इसे उकसावा करार दे रहे हैं।
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